Bihar Bhakti Andolan

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Bihar Bhakti Andolan with the victims of Koshi Disaster in 2008

बिहार-भक्ति क्या है ?

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Tuesday, February 23, 2010

पारिवारिक-शान्ति के मनोवैज्ञानिक आधार

(यह लेख पटना में आयोजित एक सेमिनार के लिए मेरे द्वारा हाल ही में लिखा गया )
महिला-अत्याचार की समस्या के समाधान के सन्दर्भ में एक पक्ष की उपेक्षा अब तक की जाती रही है वह है इस समस्या का मनोवैज्ञानिक पक्ष.. विज्ञान द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है कि प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार, उसके मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना  और उन कोशिकाओं में  होने वाली रासायनिक प्रतिक्रया पर निर्भर करता है  और उसी के द्वारा नियंत्रित होता ..

दो व्यक्ति , समान परिस्थितियों में, किसी एक समस्या के प्रति, दो प्रकार की अनुक्रिया प्रकट करते हैं .. एक व्यक्ति अवैध अनुक्रिया कर सकता है और वहीं दूसरा व्यक्ति विधि-सम्मत, स्वस्थ और संतुलित अनुक्रिया व्यक्त कर सकता है ..यह मूलतः उसकी मस्तिष्क-कोशिकाओं में उस समय होने वाली रासायनिक प्रतिक्रया पर निर्भर करता है .
भारतीय जीवन-दृष्टि, इस प्रकार की समस्याओं के  समाधान के लिए , अत्यंत वैज्ञानिक एवं संतुलित विधि का निर्धारण करती है .
गृहस्थ-जीवन की समस्याओं , विशेषतः महिला-अत्याचार के निवारणार्थ 
हमारे यहाँ प्रत्येक गृहस्थ के लिए दैनिक जीवन पद्धति निर्धारित है..प्रातः काल सूर्योदय के पूर्व जागना और  नित्य-कर्म के पश्चात  सर्व प्रथम
आध्यात्मिक चिंतन करना ..इसमें प्राणायाम करना , अपने इष्टदेव का स्मरण करना , उनके चरित्र का अनुशीलन करना आदि सम्मिलित है . आदि पुरुष मनु महाराज ने कहा था -- ब्राह्मे मुहूर्ते बुद्ध्येत, धर्मार्थौ  चानुचिन्तयेत .. अर्थात ब्राह्म मुहूर्त में प्रबुद्ध होकर , धर्म और अर्थ का चिंतन करना चाहिए .. भारत में सदा ही धर्म-सम्मत अर्थ के उपार्जन का संस्कार दिया जाता रहा है .
कभी भी हमारे यहाँ भौतिक समृद्धि के प्रति उपेक्षा का भाव नहीं भरा गया ..अर्थात - जिन कारणों  से व्यक्ति, तनाव-ग्रस्त होकर अपने व्यवहार को , अज्ञात-भाव से ही , हिंसक बना लेता है और उस हिंसा के शिकार उसके निकटस्थ-जन ही होते है उन  कारणों को भारतीय जीवन पद्धति का अनुसरण करके समाप्त किया जा सकता है .
पारवारिक-शान्ति और सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए भारत ने कई पद्धतियाँ विकसित की थीं जिनका आध्यात्मिक महत्त्व  तो है ही , उनका पारिवारिक , सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और स्त्री के प्रति अप्रतिम सम्मान की दृष्टि से भी, अमूल्य महत्त्व है ..
हमारे यहाँ प्रत्येक गृहस्थ के लिए प्रतिदिन  कुमारी पूजन का प्रावधान किया गया और परम  श्रद्धा  और  समर्पण  के  साथ  इस धर्म-पालन से अक्षय  पुण्य प्राप्त होने की बात कही गयी .. इस अनुष्ठान में अविवाहित लड़कियों को देवीभाव से पूजन करते हुए , उन्हें आभूषण, वस्त्र, दक्षिणा के रूप में धन भी देने का नियम है . कहा गया कि इस अनुष्ठान से माँ जगदम्बा प्रसन्न होतीं है और कर्ता के सभी कष्टों को दूर करते हुए उसकी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं ..
इसी प्रकार, अनेक धार्मिक अवसरों पर तथा विवाह के अवसर पर विशेषरूप से विवाहित महिलाओं को भी देवीभाव से उक्त विधि से पूजित  और सम्मानित करने का विधान किया गया .. 
कल्पना करें कि जिस घर में यह अनुष्ठान नियमित रूप से होता रहे उस घर के पुरुषों में स्त्री के प्रति किसी प्रकार का असम्मानपूर्ण  भाव आ सकेगा ? उस घर के लड़कों में भी  स्त्री के प्रति बचपन से ही आदर का भाव पैदा  होगा और उसका प्रभाव उनके भावी जीवन पर भी पडेगा ..
कल्पना करें कि क्या जिस घर में देवी भाव में छोटी लड़कियों का कुमारी-पूजन होता हो वहां कन्या-भ्रूण ह्त्या की बात कोई सोच सकेगा ?
जिस घर में विवाहित-स्त्रियों को सादर बुलाकर देवीभाव से उनका पूजन करके उन्हें सम्मान दिया जाता हो उस घर में क्या कोई पुरुष स्त्री-प्रतारणा की ओर उन्मुख होगा ?
मैंने स्त्री-प्रतारणा के अनेक मामलों का निष्पादन सलाह और सद्विचार देकर किया है.. शुभ विचार एक मादक सुगंध की तरह मन और मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं . किन्तु विचारों का रण-नीतिक प्रयोग अक्सर नहीं किया जाता ..
 इन मामलों में यदि भारतीय परिवार-प्रणाली के सभी मूलभूत सिद्धांतों का अनुप्रयोग करते हुए आगे बढ़ा जाय तो पारिवारिक और कौटुम्बिक शान्ति को स्थायी बनाया जा सहता है ..मैंने अक्सर देखा है कि पत्नी में सौन्दर्य, शिक्षा आदि  सभी गुण थे ,  किन्तु पति , चूँकि परिवार के अन्य सदस्यों के अशुद्ध विचारों से प्रभावित था, इसलिए सभी के साथ, वह भी दहेज़ का लोलुप बना हुआ था .. ऐसे लोगो को उनकी मूर्खता का स्मरण दिलाकर मामले  को सुलझाया जा सकता है .. 
स्त्री-प्रताड़ना निरोध के लिए मनोवैज्ञानिक उपायों में,  मैं संगीत को सर्वाधिक प्रभावी उपाय पाता हूँ . 
प्रत्येक गृहस्थ को संगीत, गीत के प्रति परिवार के प्रत्येक सदस्य में रूचि उत्पन्न करने का विशेष प्रयास करने चाहिए .. संगीत का प्रभाव मन पर गहन रूप में पड़ता है और संगीत मनुष्य के व्यवहार को भी प्रभावित करता है ..यह वैज्ञानिक प्रयोगो से साबित हो चुका है ..संगीत, साहित्य और कला के प्रति सवाभाविक रुचि होने के कारण पश्चिम बंगाल में स्त्री-प्रताड़ना के मामले सबसे कम पाए जाते हैं .
इस सम्बन्ध में, पश्चिमी देशों के द्वेष एवं प्रतियोगितापूर्ण विचारों  का अनुसरण  बंद करना होगा तभी  हम इसका स्वस्थ और समाज के लिए फलप्रद समाधान कर पायेगे..
पश्चिमी देशों के प्रभाव में यह भी कहा जाता है कि स्त्री को स्त्री होने के कारण प्रताड़ित  किया जाता है.. परन्तु समीक्षा से यह तथ्य असत्य साबित नहीं होता है ..वास्तव में जो शक्तिहीन होगा उसके प्रताड़ित होने की सभावना बनी रहेगी .. इसलिए स्त्री के सशक्तीकरण की प्रक्रिया को सार्वभौम रूप देकर भी इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है .. श्री राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत सरकार ने  पंचायतों में स्त्रियों को  १५ प्रतिशत  आरक्षण देकर स्त्री सशक्तीकरण के महायग्य  में जो आहुति डाली थी उसे बिहार सरकार ने ५० प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान  करके और अधिक प्रज्ज्वलित किया है .. वास्तव में स्त्री प्रतारणा रोकने के लिए सामाजिक शक्तियों को भी  इस प्रकार के प्रभावी उपाय करने होगे जिससे मनोवैज्ञानिक रूप से स्त्री को सम्मानित करने की प्रवृत्ति  सभी में उत्पन्न हो..


-- अरविंद पाण्डेय

7 comments:

sadhana said...

नमस्कार !
महिला-अत्याचार की समस्या के समाधान के सन्दर्भ में जो आपने मनोवैगानिक पक्ष को रखे. उससे मै सहमत हूँ और मै समझती हूँ कि बिलकुल सही भी है ....
किन्तु मै ऐसा समझती हूँ कि पारिवारिक शांति के लिए, ...मै भी एक महिला हूँ फिर भी बोलना चाहूंगी कि महिला अत्याचार के लिए पुरुषो से ज्यादा महिलाओ का ही योगदान ज्यादा है ...एक महिला ही एक महिला ... See more को ज्यादा प्रताड़ित करती है .चाहे वो दहेज़ का मामला हो या फिर देवी पूजा का हो ...या फिर पुरुषो में महिलाओ के प्रति अनादर का भाव का बीज बोना हो ....जिस दिन महिला ,महिला को सम्मान देने लगेगी उस दिन समाज से ७५%महिला-अत्याचार कि समस्यायों का समाधान हो जायेंगे .....
महिलाओ के आरक्षण के संदर्भ में ....मुझे ऐसा लगता है कि हमें आरक्षण नहीं चाहिए ...क्योकि आरक्षण तो उसे मिलता है, जो कमजोर है ...और हम कमजोर नहीं है इसीलिए हमें बराबरी चाहिए आरक्षण नहीं .....धन्यवाद !!!!!

Er. AMOD KUMAR said...

विश्व के सभी धर्मं ग्रंथो में नारी सम्मान को बहुत ही अच्छी अच्छी बातें लिखी हुई है , हम लोगो के समाज में कुछ लोग घर में बेटी जन्म लेती है तो उसे अभिशाप समझते है . इसका मुख्य कारण दहेज़ प्रथा है , जैसा मुझे समझ है , [ हमें गौरव है अपने घर का जहाँ पे मुझे पुत्री का जन्म हुआ तो सभी लोगो ने जय माँ लक्ष्मी समझ कर चारो तरफ पूजा किया ] .
आदरणीय सर मैं ही नहीं सभी लोग आपकी बात से सहमत है , पर समाज के कुछ प्रदूषित लोग के कारण खुद भी अपने आप पर शर्म आने लगती है , लेकिन मुझे परम विश्वास है क़ी नियति सब कुछ ठीक कर देगी |

mukesh said...

respected sir i agree with ur argument but i think in any case of mahila utpidan or atyachar a women always leading main role so my opinion if any seminar about this topic there always discussion about this topic that a women is always responsible for a another women problem

Rajesh Kumar said...

I agree with you totaly. And I will suggest every body to trained their mind for any situation and use right brain. I know personaly one organisation http://www.tejgyan.org/ which is organising the courses free of cost Happy thought!! happy life n above all Positive thinking!!!!.

Do not make noise is not positive thinking instead Keep quite, is

Do not smoking is not positive thinking Healthy life, is...

I will suggest all my friends n relative to go through onece the objective of the same.

Thanx
Rajesh Kumar
9223294771
Mumbai,

Native to Samatipur, Bihar.

Rajesh Kumar said...

I totaly agree with you. And it is all about of Positive thinking!!!
Happy Thoughts!!!

Agar koi mahila bolti hai ki main apne saas ki tarah nahi banungi. Basically she is saying apne saas ki tarah banungi. kunki Mind main nahi ki koi jagah nahi hoti. Nahi Mat no ko wo nikal kar padhta hai.

I will suggest every body to go through the free spritual course
http://www.tejgyan.org/

Thanx
Rajesh Kumar
9223294771
Mumbai

Native to Samastipur, Bihar.

ajit kumar mishra said...

नमस्कार,
महिला अत्याचार एक ऐसा मामला जिसमे सब अपनी टांग अड़ाते है और आधी अधूरी सलाह देकर निकल जाते हैं। मैं यहाँ स्पष्ट कहता हूँ कि आपके विचार भी समस्या के एक पक्ष को ही देखते है। केवल मनेवैज्ञानिक कारण ही नहीं है। बल्कि मनोवैज्ञानिक, आर्थिक, समाजिक कारण भी है। आप इस बात से सहमत होगें कि दहेज तथा हरिजन उप्पीड़न के अधिकतर मामलों मे इन कानूनो को हथियार के रुप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। शादी के समय लड़की पक्ष के द्वारा झूठ बोलकर ज्यादा उम्मीदे जगाना और फिर पूरी न कर पाना भी एक कारण है। मैं खुद कई लोगो को जानता हूँ कि जिन्होने यह सोचकर झूठ बोला कि शादी के बाद सब ठीक हो जायेगा परन्तु झूठ का पता लगने पर लड़के पक्ष से कुछ लो चुप रहे किसी भी कारण से परन्तु कुछ मामलो में दहेज, महिला उत्पीड़न जैसे कानून का हथियारो का खुलकर करके लड़ाई लडी जा रही है और इसमें पिस रहा है वह लड़का जिसका इस मामले में इतनी ही भूमिका है कि उसने शादी की।

वाणी गीत said...

अजित कुमार मिश्रा जी से सहमत ....
दोनों पक्षों या किसी भी समस्या के दोनों पक्षों को देखकर ही निर्णय लिया जाना चाहिए ...बढती महत्वाकांक्षाओं ने प्रतादितों की संख्या बधाई है ...पुरुष और महिला दोनों की ही ...
वही साधनाजी के महिला आरक्षण सम्बन्धी विचार से भी सहमत हूँ ....आरक्षण नहीं ...अपने दम ख़म पर आगे बढे महिलाएं तभी उनके विकास की सार्थकता है ....