बिहार के स्वर्णिम अतीत को स्वर्णिम वर्तमान तथा स्वर्णिम भविष्य में रूपांतरित करने और बिहारी स्वाभिमान को जागृत करने के लक्ष्य के साथ अग्रसर सभी बिहारियों का प्रथम प्रयास
Bihar Bhakti Andolan
Bihar Bhakti Andolan with the victims of Koshi Disaster in 2008
बिहार-भक्ति क्या है ?
इस वीडिओ को अवश्य देखने का कष्ट करें.आप इसे बार बार देखेगें और अपने मित्रों को भी शेयर करेगें !
Dear Friends, Watch this video, created by Bihar Bhakti Andolan, you will watch it repeatedly then and will be inspired to Share it to All Your Friends : Bihar Bhakti Andolan.
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Monday, May 28, 2012
The Eternal Poetry : परावाणी : Aravind Pandey: राजनीतिक और आध्यात्मिक स्फोटवाद के द्रष्टा:महर्षि ...
The Eternal Poetry : परावाणी : Aravind Pandey: राजनीतिक और आध्यात्मिक स्फोटवाद के द्रष्टा:महर्षि ...: राजनीतिक और आध्यात्मिक स्फोटवाद के द्रष्टा :महर्षि पतंजलि ------------------------------ ------------------------------ --------------- ...
Sunday, April 22, 2012
Think that you will be attacked, then move !
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा डी एम् का अपहरण किये जाने की घटना नक्सलवाद-निवारण की पूरी रणनीति के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता बता रही है.आप इस प्रकाशित समाचार को ज़रूर पढ़ें और अपने विचार दे.१९९३ में मैं चतरा का एस पी था - .. जिले में नक्सलवाद के मुख्यालय प्रतापपुर के एक गाँव नारायणपुर में नक्सलवादियों ने एक स्कूल भवन ध्वस्त कर दिया था.मैं गया वहाँ.आमलोगों की विशाल सभा में उन्हें बताया कि ये नक्सलवादी स्कूल भवन इसलिए तोड रहे हैं जिससे आपके बच्चे पढ़-लिख कर डी एम्, एस पी, बी डी ओ , थानाध्यक्ष न बन सकें और इनके साथ जंगलों में घूम कर इनकी बंदूके ढोते रहें.मैंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि आज से १० साल बाद आपके गाँव का बच्चा ही यहाँ के डी एम् , एस पी के रूप में पदस्थापित हो..नक्सलवादी इस क्षेत्र से २५ लाख रुपये लेवी लेते हैं लेकिन आपके बच्चों के लिए इन्होने एक भी स्कूल भवन नहीं बनाया ..तो ये आपके दुश्मन हैं ..आप इनसे लेवी का हिसाब मांगिये ..
इसका प्रभाव पड़ा और मेरे पहले चतरा में अनेक पुलिस अधिकारी-कर्मीं, नक्सलवादी हमले में शहीद हुए थे किन्तु मेरे कार्यकाल में पुलिस पर ये लोग हमला नहीं कर सके..कारण -- उस क्षेत्र में किसी भी स्थान पर जाने के पूर्व मैं यह मानकर चलता था कि मेरे काफिले पर हमला होगा और तब उस हमले को पूरी तरह नाकाम करने की रण-नीति के साथ वह यात्रा की जाती थी..कुंदा और प्रतापपुर में बी एस एफ और जिला पुलिस की गाड़ी को भी इन लोगो ने मेरे पहले लैंड माइन से ध्वस्त किया था किन्तु मेरे समय में ये सब नहीं हो पाया .. उसका एक कारण ईश्वर की कृपा तो थी ही और उस कृपा के कारण मेरे द्वारा बरती गई अतिशय सावधानी..
अरविंद पाण्डेय
Wednesday, September 21, 2011
Bihar Police Song by Aravind Pandey IPS 1988 Bihar Cadre .wmv
Bihar Police Song by Aravind Pandey..IPS 1988.
This is the First Inspirational Song of Bihar Police ,Created by Aravind Pandey..This was written , Composed and Sung by Aravind Pandey in 2003 and was released in an Album by Venus..
आरक्षी हम नौजवान हैं.
हम बिहार की आन बान हैं.
अपने खून से इतिहासों के,
पन्नों पर लिखते निशान हैं.
आरक्षी हम नौजवान हैं.
हम बिहार की आन-बान हैं.
१.
बारूदों से भरी राह पर हम बेफिक्र बढे जाएँ.
हम काँटों का हार बनाकर इक दूजे को पहनाएं.
जन जन की रक्षा को हम सब, अपना तन मन धन खोएं .
हम जगते रातों को जिससे सुख की नींद सभी सोएं.
हम हैं खून बहाते अपना, हमें यही इक चाह.
सबकी हो खुशहाल ज़िंदगी , भरे न कोई आह.
रहे सदा खुशहाल हमारा
भारत जो हम सब का प्यारा.
जब जब जनता हमें पुकारे
हम देते हैं उसे सहारा.
जय बिहार जय हिंद.
जय बिहार जय हिंद.
आरक्षी हम नौजवान हैं.
हम बिहार की आन-बान हैं.
२ .
नगर-नगर बन-बन पर्वत पर
हम दिन रात गश्त करते हैं.
उग्रवाद का जाल तोड़कर
हम आगे बढ़ते चलते हैं.
अपराधी के सीने पर जब
गरज उठें बंदूकें अपनी .
मानव का अधिकार बचे,
लग जाय जान की बाज़ी अपनी.
हम मिट जाँय मगर विजयी हो अमर बिहार महान .
पुलिस आज है तुम्हें दे रही अपना यह पैगाम-
जिओ तो ऐसे जिओ कि जिससे लोग तुम्हारा मान करें.
मरो तो ऐसे मरो तुम्हारे लिए ये दुनिया आह भरे.
जिस मिट्टी में जनम लिया है,
जिस माता का दूध पिया है,
जिस कूएँ ऩे प्यास बुझाई ,
क्या कुछ तुमने उसे दिया है.
आरक्षी हम नौजवान हैं.
हम बिहार की आन बान हैं.
-----Aravind Pandey
Thursday, August 25, 2011
बिहार का निर्णय : श्री अभयानंद:पुलिस महानिदेशक
| श्री अभयानंद और श्री अरविंद पाण्डेय २००९ में मुज़फ्फरपुर के एक कार्यक्रम में. |
कुछ करो आखिर तो तुम भी इस ज़मीं के हो सपूत.
अब तो इस सूबे की सूरत और सजनी चाहिए.
In the Era of Engulfing Movement for Demand of Jan Lokpal, Bihar, in the Visionary Leadership of Shri Nitish Kumar, Decides to make the system once again'' the best Administered '', so, appoints Shri Abhayanand as Director General of Police.Shri Abhayanand, an officer with vision of Effective Honesty, the Concept-Creator of Wold-Famous Super30. Mere one decision of Government has created a wave of expected joy among those who want to see '' Bihar , the Best '' , at the same time, it created expected fear among corrupts who live with philosophy that all politicians are in favor of weak administrators..Again , Shri Nitish Kumar proved himself to be different among his own community.. Let the Bihar meet his Destiny soon..Shri Abhayanand and Shri Aravind Pandey in 2009.
Saturday, August 6, 2011
' हम आपके हैं दोस्त '' Book on Creative Policing by Aravind Pandey
'' हम आपके हैं दोस्त ''
१०० पृष्ठों की यह पुस्तक.मेरी दूसरी पुस्तक है ...९, १०, ११ जुलाई २०११ को पटना में आयोजित Anti Human Trafficking Workshop में मैंने बिहार के ४० पुलिस उपाधीक्षकों के साथ सहायक अभियोजन अधिकारी तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बुलाया था..प्रतिभागियों को अनेक विशेषज्ञों ऩे क़ानून की जानकारी दी ..विषय के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पक्ष पर दिए अपने वक्तव्य में मैंने उन्हें बताया कि इस समय पुलिस के आधुनिकीकरण के पहले मानवीकरण की आवश्यकता है.,अपनी इस पुस्तक में मैंने क़ानून और प्रक्रिया के ज्ञान के साथ पुलिस अधिकारियों को यह बताया है कि उन्हें पहले अपने मन और मस्तिष्क की '' आतंरिक पुलिसिंग '' करनी होगी जिससे जिन प्रलोभनों के कारण वे अपनी शक्ति का प्रयोग सही तरीके से लोकहित में नहीं कर पाते हैं वह कर पायें.
अरविंद पाण्डेय
Sunday, December 12, 2010
New Bihar Again takes Historical Decision
श्री नीतीश कुमार की पहल पर बिहार मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि विधायक-मद के लिए आवंटित वार्षिक एक करोड़ रुपये की राशि का प्रवाधान ख़त्म किया जाय.इसके पीछे तर्क यह है कि इस एक करोड़ की आवंटित राशि के वितरण में विधायको को उस क्षेत्र के लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ता है जिस क्षेत्र के लिए वे उस राशि से वे आवंटन नहीं दे पाते.यह भी तर्क है कि इस राशि के नियमानुसार उपयोग में सम्बंधित अधिकारी ध्यान नहीं देते और विधायको को बदनामी झेलनी पड़ती है.
विधायको को यह बताया गया है कि वे जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में अपने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का का सारा कार्य कराने, विशिष्ट अनुशंसा करने,उसका क्रियान्वयन कराने में सक्षम होगे और उनकी अनुशंसाओं को मानना जिला विकास अधिकारियों की बाध्यता होगी.
बिहार के आमलोगों ने इस निर्णय को पसंद किया है और इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया ज रहा है.
इस निर्णय के बाद अब विधायको के वेतन भत्ते में सरकार को वृद्धि करनी चाहिए.यह वृद्धि नियम के अनुसार आवश्यक भी है क्योकि विधायक की स्थिति, शिष्टाचार (Protocol) की दृष्टि से, राज्य के सभी अधिकारियों से ऊपर है.राज्य के सर्वोच्च अधिकारी मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को विधायक का स्वागत अपने कार्यालय काश में खड़े होकर करना है.किन्तु दोनों के वेतन में ज़मीन-आसमान का फर्क है.जबकि राज्यव्यवस्था में वेतन के अधिक या कम होने से ही वरीयता या उच्चता का निर्धारण होता है.ऐसी स्थिति में विधायक का वेतन भत्ता मुख्यसचिव से अधिक किया जाना ही नियमानुसार उचित होगा.
लोकहित में एक निर्णय और अपेक्षित है कि जैसे जिलाधिकारी,पुलिस अधीक्षक जैसे क्षेत्रीय अधिकारियों का आवास उनके क्षेत्र में ही होता है उसी तरह विधायक और सांसद का आवास भी उनके विधानसभा क्षेत्र और लोकसभा क्षेत्र में ही हो.जिससे वे अपने क्षेत्र में रहकर उस क्षेत्र की जनता की तरह ही जीवन यापन कर सके.इससे वे अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान तथा उस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए और अधिक समर्पित भाव से काम कर पायेगे और ऐसा काम करना उनकी बाध्यता भी होगी.
बिहार सरकार का यह निर्णय एक ऐसा निर्णय है जिसे बिहार और सारे देश के एक एक नागरिक का समर्थन प्राप्त है.सरकारें ऐसा निर्णय कभी कभी ही कर पाती हैं.इसलिए यह निर्णय ऐतिहासिक है.
-- Bihar Bhakti Aandolan Trust
विधायको को यह बताया गया है कि वे जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में अपने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का का सारा कार्य कराने, विशिष्ट अनुशंसा करने,उसका क्रियान्वयन कराने में सक्षम होगे और उनकी अनुशंसाओं को मानना जिला विकास अधिकारियों की बाध्यता होगी.
बिहार के आमलोगों ने इस निर्णय को पसंद किया है और इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया ज रहा है.
इस निर्णय के बाद अब विधायको के वेतन भत्ते में सरकार को वृद्धि करनी चाहिए.यह वृद्धि नियम के अनुसार आवश्यक भी है क्योकि विधायक की स्थिति, शिष्टाचार (Protocol) की दृष्टि से, राज्य के सभी अधिकारियों से ऊपर है.राज्य के सर्वोच्च अधिकारी मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को विधायक का स्वागत अपने कार्यालय काश में खड़े होकर करना है.किन्तु दोनों के वेतन में ज़मीन-आसमान का फर्क है.जबकि राज्यव्यवस्था में वेतन के अधिक या कम होने से ही वरीयता या उच्चता का निर्धारण होता है.ऐसी स्थिति में विधायक का वेतन भत्ता मुख्यसचिव से अधिक किया जाना ही नियमानुसार उचित होगा.
लोकहित में एक निर्णय और अपेक्षित है कि जैसे जिलाधिकारी,पुलिस अधीक्षक जैसे क्षेत्रीय अधिकारियों का आवास उनके क्षेत्र में ही होता है उसी तरह विधायक और सांसद का आवास भी उनके विधानसभा क्षेत्र और लोकसभा क्षेत्र में ही हो.जिससे वे अपने क्षेत्र में रहकर उस क्षेत्र की जनता की तरह ही जीवन यापन कर सके.इससे वे अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान तथा उस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए और अधिक समर्पित भाव से काम कर पायेगे और ऐसा काम करना उनकी बाध्यता भी होगी.
बिहार सरकार का यह निर्णय एक ऐसा निर्णय है जिसे बिहार और सारे देश के एक एक नागरिक का समर्थन प्राप्त है.सरकारें ऐसा निर्णय कभी कभी ही कर पाती हैं.इसलिए यह निर्णय ऐतिहासिक है.
-- Bihar Bhakti Aandolan Trust
Friday, December 10, 2010
First Apeal to Build New Bihar by Aravind Pandey in2003
बिहार के समृद्ध होने और सम्पूर्ण देश को सशक्त बनाने की अपार संभावनाएं हैं..किन्तु, पिछले ३० वर्षों से यहाँ पूंजी निवेश संभव नहीं हो पाया परिणाम स्वरुप यहाँ से अकुशल श्रमिकों के पलायन के साथ साथ कुशल श्रमिकों अन्य प्रतिभाशालियों का पलायन एक संस्कृति बन गई थी. किन्तु वर्ष २००० के बाद से बिहार का पुनर्जागरण एक अनिवार्य नियति सी बनकर दिखाई देने लगा जब ७ दिनों के लिए ही एक ऐसी सरकार बनी जिसके प्रमुख की ईमानदारी आम जनता की दृष्टि में असंदिग्ध थी..
वर्ष २००० से ही , बिहारी-स्वाभिमान और प्राचीन भारत की गौरवशाली परम्परा, उसकी अविजित सभ्यता-संस्कृति का उल्लेख करते हुए बिहार भक्ति आन्दोलन ने एक वैचारिक जन-जागरण प्रारम्भ किया..उसी क्रम में बिहार के औरंगाबाद जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार भक्ति आन्दोलन के प्रवर्तम अरविंद पाण्डेय के वक्तव्य का यह वीडिओ है जिसमे उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में स्पष्ट रूप से -- एक नया बिहार -- बनाने के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया..
----अरविंद पाण्डेय
Tuesday, April 6, 2010
ये पाखंडी जनता के दुश्मन हैं
माओवाद के नाम पर अब तक का सबसे बड़ा पाखण्ड, भारत मे सक्रिय सबसे बड़े अपराधी-गिरोह ने आज दंतेवाडा मे किया है.खुद को माओवादी , नक्सलवादी लेनिनवादी कहने वाले इन पाखंडियों से मैंने अक्सर अपनी फील्ड पोस्टिंग के समय दास कैपिटल की शास्त्रीय भाषा मे शास्त्रार्थ किया है और कुछ प्रश्न पूछे हैं जो आज इस ब्लॉग के माध्यम से फिर पूछ रहा हूँ ..
ये प्रश्न इनके पापों का औचित्य बताने वाली श्रीमती अरुंधती राय और उन जैसे लोगो से भी पूछे जा रहे हैं जो सर्वहारा के इन सबसे बड़े और खतरनाक ऐतिहासिक दुश्मनों के भय से इनका बौद्धिक समर्थन करते हैं --
१.क्या १९४९ मे चीनी सेना के सहयोग से हुई माओवादी सशस्त्र क्रान्ति के बाद , दुनिया के किसी बड़े देश मे सशस्त्र क्रान्ति हुई है ?? यदि नहीं तो फिर यह असंभव स्वप्न दिखाकर सर्वहारा का बौद्धिक शोषण क्यों??
२.क्या आज के प्रबल वैज्ञानिक युग मे विश्व के राष्ट्रों के पास जो शस्त्र ( परमाणु बम जैसे महाविनाशकारी शस्त्र ) उपलब्ध है वैसे शस्त्र इन कथित माओवादियों के पास कभी भी हो सकते हैं ??
३.यदि नहीं तो क्या इस युग मे सशस्त्र क्रान्ति का स्वप्न दिखाकर युवाओं को एक मिथ्या और कभी न घटित हो सकने वाले सिद्धांत का अनुयायी बनाकर उनकी नियति के रूप मे उनका विनाश लिख देना मार्क्सवाद, लेनिनवाद , माओवाद, की ह्त्या नहीं है ??
४.जिस क्षेत्र मे नक्सलवादी अपनी ताकत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है क्या उस क्षेत्र मे वे सर्वहारा के लिए चलाई जा रही विकास योजनाओं से ३०% या उससे भी अधिक लेवी नहीं ले रहे ?? यदि ले रहे तो क्या यह उसी सर्वहारा का शोषण और उनका मांस भक्षण नहीं जिस सर्वहारा की मुक्ति की बात वे सशस्त्र क्रान्ति के द्वारा करने का झूठा वादा और दावा कर रहे.??
ये प्रश्न और इनके उत्तर के रूप मे प्रश्नित-समूह का शाश्वत मौन यह बताता है कि इस देश मे मानसिक रूप से असंतुलित और विकृत लोगो का एक ताकतवर समूह इक्कीसवीं शताब्दी को समय-पूर्व ही पीछे छोड़ देने की ताकत रखने वाले भारत को, उस प्रस्तरयुगीन कालखंड मे ले जाना चाहता है जब जंगल का क़ानून मानवता के बौद्धिक सौन्दर्य को विकसित ही नहीं होने दे रहा था..
हमारे देश की संवैधानिक-व्यवस्था, जिन एजेंसियों के माध्यम से देश के समस्त नागरिको को आर्थिक न्याय दिलाना चाहती है वह भ्रष्ट हो चुकी है - यह सत्य है ..
यह सत्य है कि जिस पूर्व मध्यप्रदेश के दंतेवाडा मे इन पाखंडियो ने नरसंहार किया है उसी प्रदेश के एक आई ए एस अधिकारी और उसकी अधिकारी पत्नी के पास से कुछ ही दिन पूर्व आम जनता से लूटे हुए करोडो रुपये बरामद किये गए ..
यह सत्य है कि पूरे देश मे सरकारी अधिकारी जनता के पैसो की लूट के आरोपित हो रहे हैं ..
तो क्या इसका समाधान वही है जो दंतेवाडा मे या और जगहों पर इस अपराधी गिरोह द्वारा किया जा रहा है ..और क्या गारंटी है कि इन पाखंडियो के शाशन मे इनके अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं करेगे ..
क्या अरुंधती राय या अन्य कोई भी माओवादी नेता यह बतायेगे कि नक्सलवादियो ने पिछले पांच वर्षों मे कितनी लेवी वसूली और उसका खर्च कैसे किया ??
क्या ये लोग अपने प्रभाव क्षेत्र के लोगो को अपनी आडिट रिपोर्ट देते हैं ? यदि ऐसा नहीं है तो ये लोग उन जंगली आदमखोर जानवरों से भी खतरनाक है जो अपने ही समूह के सदस्यों का मांस खाकर तृप्त होते है क्योकि ये मानवभक्षण का पाप जान बूझ कर कर रहे हैं .
यदि क्रान्ति करना है तो इस देश के नौजवानों को संगठित और शिक्षित करके उन्हें आई ए एस , आई पी एस जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर बैठकर ईमानदारी से आम जनता की सेवा करने का प्रशिक्षण दो ..
इन ताकतवर सेवाओं मे रह कर रिश्वत न लेकर दिखाओ तब क्रान्ति जैसे पवित्र शब्द का उच्चारण करो ..
मैंने पलामू, चतरा , गया जैसे नक्सलवाद प्रभावित जिलों के एस पी और डी आई जी के रूप मे इन पाखंडी माओवादियों के मिथ्याचार का पर्दाफ़ाश किया था और अब भी कर रहा हूँ.. मैंने पैम्फलेट प्रकाशित कराकर इन्हें बौद्धिक और व्यवहारिक स्तर पर कमज़ोर, पाखंडी और मिथ्याचारी साबित किया था..वह पैफ्लेट आप भी देखें..
ये प्रश्न इनके पापों का औचित्य बताने वाली श्रीमती अरुंधती राय और उन जैसे लोगो से भी पूछे जा रहे हैं जो सर्वहारा के इन सबसे बड़े और खतरनाक ऐतिहासिक दुश्मनों के भय से इनका बौद्धिक समर्थन करते हैं --
१.क्या १९४९ मे चीनी सेना के सहयोग से हुई माओवादी सशस्त्र क्रान्ति के बाद , दुनिया के किसी बड़े देश मे सशस्त्र क्रान्ति हुई है ?? यदि नहीं तो फिर यह असंभव स्वप्न दिखाकर सर्वहारा का बौद्धिक शोषण क्यों??
२.क्या आज के प्रबल वैज्ञानिक युग मे विश्व के राष्ट्रों के पास जो शस्त्र ( परमाणु बम जैसे महाविनाशकारी शस्त्र ) उपलब्ध है वैसे शस्त्र इन कथित माओवादियों के पास कभी भी हो सकते हैं ??
३.यदि नहीं तो क्या इस युग मे सशस्त्र क्रान्ति का स्वप्न दिखाकर युवाओं को एक मिथ्या और कभी न घटित हो सकने वाले सिद्धांत का अनुयायी बनाकर उनकी नियति के रूप मे उनका विनाश लिख देना मार्क्सवाद, लेनिनवाद , माओवाद, की ह्त्या नहीं है ??
४.जिस क्षेत्र मे नक्सलवादी अपनी ताकत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है क्या उस क्षेत्र मे वे सर्वहारा के लिए चलाई जा रही विकास योजनाओं से ३०% या उससे भी अधिक लेवी नहीं ले रहे ?? यदि ले रहे तो क्या यह उसी सर्वहारा का शोषण और उनका मांस भक्षण नहीं जिस सर्वहारा की मुक्ति की बात वे सशस्त्र क्रान्ति के द्वारा करने का झूठा वादा और दावा कर रहे.??
ये प्रश्न और इनके उत्तर के रूप मे प्रश्नित-समूह का शाश्वत मौन यह बताता है कि इस देश मे मानसिक रूप से असंतुलित और विकृत लोगो का एक ताकतवर समूह इक्कीसवीं शताब्दी को समय-पूर्व ही पीछे छोड़ देने की ताकत रखने वाले भारत को, उस प्रस्तरयुगीन कालखंड मे ले जाना चाहता है जब जंगल का क़ानून मानवता के बौद्धिक सौन्दर्य को विकसित ही नहीं होने दे रहा था..
हमारे देश की संवैधानिक-व्यवस्था, जिन एजेंसियों के माध्यम से देश के समस्त नागरिको को आर्थिक न्याय दिलाना चाहती है वह भ्रष्ट हो चुकी है - यह सत्य है ..
यह सत्य है कि जिस पूर्व मध्यप्रदेश के दंतेवाडा मे इन पाखंडियो ने नरसंहार किया है उसी प्रदेश के एक आई ए एस अधिकारी और उसकी अधिकारी पत्नी के पास से कुछ ही दिन पूर्व आम जनता से लूटे हुए करोडो रुपये बरामद किये गए ..
यह सत्य है कि पूरे देश मे सरकारी अधिकारी जनता के पैसो की लूट के आरोपित हो रहे हैं ..
तो क्या इसका समाधान वही है जो दंतेवाडा मे या और जगहों पर इस अपराधी गिरोह द्वारा किया जा रहा है ..और क्या गारंटी है कि इन पाखंडियो के शाशन मे इनके अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं करेगे ..
क्या अरुंधती राय या अन्य कोई भी माओवादी नेता यह बतायेगे कि नक्सलवादियो ने पिछले पांच वर्षों मे कितनी लेवी वसूली और उसका खर्च कैसे किया ??
क्या ये लोग अपने प्रभाव क्षेत्र के लोगो को अपनी आडिट रिपोर्ट देते हैं ? यदि ऐसा नहीं है तो ये लोग उन जंगली आदमखोर जानवरों से भी खतरनाक है जो अपने ही समूह के सदस्यों का मांस खाकर तृप्त होते है क्योकि ये मानवभक्षण का पाप जान बूझ कर कर रहे हैं .
यदि क्रान्ति करना है तो इस देश के नौजवानों को संगठित और शिक्षित करके उन्हें आई ए एस , आई पी एस जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर बैठकर ईमानदारी से आम जनता की सेवा करने का प्रशिक्षण दो ..
इन ताकतवर सेवाओं मे रह कर रिश्वत न लेकर दिखाओ तब क्रान्ति जैसे पवित्र शब्द का उच्चारण करो ..
मैंने पलामू, चतरा , गया जैसे नक्सलवाद प्रभावित जिलों के एस पी और डी आई जी के रूप मे इन पाखंडी माओवादियों के मिथ्याचार का पर्दाफ़ाश किया था और अब भी कर रहा हूँ.. मैंने पैम्फलेट प्रकाशित कराकर इन्हें बौद्धिक और व्यवहारिक स्तर पर कमज़ोर, पाखंडी और मिथ्याचारी साबित किया था..वह पैफ्लेट आप भी देखें..
मानवीय सभ्यता के ऊपर नक्सलवाद से बड़ा खतरा कभी नहीं पैदा हुआ क्योकि यह अतीत के सभी खतरों से अधिक पाखण्ड पूर्ण है..
--- अरविंद पाण्डेय
Wednesday, March 24, 2010
जब जब असभ्य इरविन कोई इठलाएगा.तब तब यह भारत,भगत सिंह बन जाएगा
१
जब कायरता को लोग अहिंसा मानेगे.
जब जब असत्य को,सत्य मान,अपना लेंगें.
जब जब असत्य को,सत्य मान,अपना लेंगें.
जब जब धरती अपनो से ही आकुल होगी.
जब हुक्मरान होगे निर्दयी, मनोरोगी.
तब तब भारत अपना पौरुष छलकायेगा.
सुखदेव, राजगुरु,भगत सिंह बन जाएगा.
२
जब जब समता का फूल कहीं कुम्हलाएगा.
जब आज़ादी का दीप बुझाया जाएगा.
जब जब इंसानी इज्ज़त, खतरे में होगी.
जब सत्ता पर काबिज़ होगा कोई भोगी
जब जब असभ्य इरविन कोई इतराएगा .
तब तब यह भारत, भगत सिंह बन जाएगा.
-- अरविंद पाण्डेय
Monday, March 22, 2010
गर्व से कहो - हम बिहारी हैं . Say with Pride-I am Bihari
===============
आज(MONDAY 22 MARCH 2010) बिहार में 'बिहार दिवस' का शासकीय आयोजन भव्य रूप में किया गया..इस आयोजन का मुख्य सिद्धांत वाक्य था -- बिहारी-अस्मिता के साथ सारे बिहारी एकात्म-शक्ति के साथ आगे बढ़ें और राज्य को समृद्धि के शिखर की ओर ले जाने हेतु अपनी समस्त ऊर्जा का प्रयोग करें..
ज्ञातव्य है कि आज लगभग दस वर्ष पूर्व ' बिहार भक्ति आन्दोलन ' नामक एक सांस्कृतिक अभियान का प्रारम्भ किया गया था.जिसके माध्यम से बिहार के लोगो को बिहारी-स्वाभिमान के कारक तत्त्वों का परिचय कराया गया..
सत्य यह है कि बिहार में भौतिक विकास को अवरुद्ध करने वाली शक्तियां , बाहर और भीतर - दोनों जगह सक्रिय थीं ..बिहार के भीतर सक्रिय शक्ति 'विकास विरोधी राजनीतिक दर्शन' के सिद्धांत के आधार पर यह मानती थी कि भौतिक विकास अर्थात औद्योगीकरण और पूंजी-निवेश निर्वाचन-विजय की गारंटी नहीं है इसलिए राजनीति के लिए विकास करना आत्मघात है और इससे पराजय हो सकती है..यह राजनीतिक दर्शन पंद्रह वर्षों तक वर्चस्व-शाली रहा.
किन्तु पंद्रह वर्षों के बाद के परिणाम से यह साबित हो गया कि पंद्रह वर्षों के बीतने के पहले ही विकास करने बात करना और संकल्प लेना इस विजय के लिए आवश्यक था.विकास-विरोधी राजनीतिक दर्शन की पराजय हुई और विकास के महासंकल्प के साथ नौ करोड़ बिहारियों के स्वप्न को साकार करने की शपथ के साथ हम आगे बढे ..
बिहार भक्ति आन्दोलन ने यह विचार २००० में ही बिहारवासियों के सामने रखा था कि हमें अपनी तंद्रा को समाप्त करने और उत्साह का नवसंचार करने के लिए भारत के स्वर्णिम अतीत को वर्तमान में रूपांतरित करने की कला सीखनी होगी .हमने कहा कि हम जहां भी रहें , गर्व से कहें कि हम बिहारी हैं..
जब बिहार के बाहर बिहारियों पर अपमान करने के लक्ष्य से हमले हो रहें हो उस समय ये नारा देना कितना कठिन और अलोकप्रिय हो सकता था किन्तु इसकी परवाह किये बिना ही आन्दोलन ने अपना विचार-विस्तार-अभियान जारी रखा.वेबसाईट के माध्यम से , ब्लॉग के माध्यम से , हम, बिहारी स्वाभिमान को पुष्ट, प्रचारित और प्रवर्तित करने की बात करते रहे और आज आन्दोलन के द्वारा प्रज्वलित दीपशिखा दुनिया के करोडो लोगो तक अपना प्रकाशपूर्ण सन्देश लेकर पहुच चुकी है. आन्दोलन द्वारा वर्ष २०० में प्रकाशित पहली पर्णिका आप देखें
हमने बिहार्भक्ति गीतों की रचना की , उसे संगीतबद्ध किया , उसकी सी डी वर्ष २००२ में ही लोगो के सामने प्रस्तुत की ..
कैसेट का आवरण पृष्ठ देखें :
हमें प्रसन्नता है कि आज बिहार भक्ति आन्दोलन का बिहारी स्वाभिमान , बिहारी अस्मिता का नारा नौ करोड़ बिहारियों का नारा बन चुका है..
हम शीघ्र ही एक सशक्त , समृद्ध और सम्मानित बिहार का निर्माण करने जा रहे हैं..
अरविंद पाण्डेय
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