यह एक महत्वपूर्ण विषय है देशभक्ति संबंधी विचारों की दृष्टि से इसलिए मैं इस पर कुछ लिखना चाहता हूँ..पिछले दिनों एक समाचार पत्र में समाचार प्रकाशित हुआ है कि सलमान खान की नई फिल्म '' वीर '' में बोले गए एक संवाद को अपनी पुस्तक से लिया गया विचार बताते हुए पवन चौधरी नामक व्यक्ति ने उच्च न्यायालय, दिल्ली के समक्ष एक रिट याचिका दाखिल की है. समाचार के अनुसार, न्यायमूर्ति वी. के .सहाली ने सलमान खान और फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा को ४ फरवरी तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है..
पवन चौधरी का आरोप है कि सलमान खान और अनिल शर्मा ने चौधरी की पुस्तक '' सफलता की त्रिवेणी ''
के उस अंश को लेकर फिल्म का एक संवाद बनाया जिसमे चौधरी ने अपनी पुस्तक में, भारत के सम्बन्ध में लिखा है कि ''भारत का आदर्श सोने की चिड़िया बनने का नहीं बल्कि सोने का बाज़ बनने का होना चाहिए '' ..
समाचार के अनुसार , चौधरी के वकील कोई श्री जयंत भूषण हैं..
इस सम्बन्ध में मै एक तथ्य रखना चाहता हूँ कि मै सदा से अपने वक्तव्यों में यह कहता आया हूँ कि '' हम सोने की चिड़िया थे इसलिए शिकारियों ने हमारा शिकार कर लिया.हमें सोने का शेर बनना है जिससे अगर कोई शिकार करने आये तो हम उसे ही शिकार बना सकें ''
उक्त समाचार पढने के बाद मुझे याद आया कि मेरे ऐसे वक्तव्यों के समाचार भी अखबारों में प्रकाशित हुआ करते थे..मैंने तलाश किया तो एक समाचार की कतरन मुझे मिली जो ६ फरवरी २००८ की थी..जिसमे मैंने मुज़फ्फरपुर डी आई जी की पदस्थापन-अवधि में, बिहार के वैशाली जिला के सेंट जोन्स अकादमी के वार्षिकोत्सव के मुख्य अतिथि के रूप में अपना वक्तव्य दिया था जिसमें स्पष्ट रूप से कहा था कि '' भारत अब सोने की चिड़िया नहीं बल्कि सोने का शेर है .जो शिकार करने आयेगा वह खुद हमारा शिकार बन जाएगा ''
यद्यपि यह वक्तव्य मुझे ५ फरवरी २००८ का ही मिला है जो समाचार पत्र की कतरन से साबित भी है ..वैसे मैं यह विचार वर्षों पूर्व से व्यक्त करता रहा हूँ . अब यदि चौधरी की किताब ५ फरवरी २००८ के बाद प्रकाशित हुई हो तो यह माना जाएगा कि मेरा वक्तव्य पुस्तक से पूर्व का है .
यदि सलमान खान या अनिल शर्मा के पास अन्य कोई प्रतिरक्षा न हो तो वे यह कह सकते है कि ये विचार मूलतः
मेरे है , पवन चौधरी के नहीं .
मुझे सिर्फ देशभक्ति के भाव से परिपूर्ण फ़िल्में चाहिए सलमान और उनके निर्देशक से जिससे हमारे नौजवान प्रेरणा ले सकें और भारत को सोने का शेर बनाने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर सकें..
इसके लिए कोई अन्य दावा नहीं है मेरा.
समाचार पत्र की कतरन को मैं इस ब्लॉग में प्रस्तुत कर रहा हूँ ..
-- अरविंद पाण्डेय
