Bihar Bhakti Andolan

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Bihar Bhakti Andolan with the victims of Koshi Disaster in 2008

बिहार-भक्ति क्या है ?

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Monday, February 8, 2010

तुम रखा करते हो अक्सर जिनके सर, सोने का ताज---


 राष्ट्र , व्यक्ति से सदा श्रेष्ठ है 
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पिछले दो तीन दिनों में , इस महान देश के करोड़ों नागरिकों ने करोड़ों घंटे इस व्यर्थ की बात को सोचने और निर्णय करने के प्रयास में खर्च कर दिए कि आई पी एल  के सम्बन्ध में हुए , शाहरुख खान और बाला साहब  ठाकरे के विवाद में कौन सही है...मुंबई में धुरंधर माने जाने वालों में इस तरह के  मैच पहले भी होते रहें हैं ..और अक्सर यह देखा गया है कि ये मैच पहले से फिक्स्ड  होते हैं . जब किसी विषय , मुद्दे या व्यक्ति को चर्चित बनाना होता है तो धुरंधरों  को कुछ कहने के लिए कहा जाता है .. वे कहते हैं और वह विषय , व्यक्ति या मुद्दा राष्ट्रीय महत्व का मान लिया जाता है ..और इस देश का टी वी सैकड़ों घंटों तक देश के लोगों को इस प्रकार के व्यर्थ के विवाद में व्यस्त रखने में सफल होता है ..
                      शाहरुख खान  ने कभी यह सोचा या इस पर कुछ कहा कि  जो लोग उनकी फिल्मे देखकर,  उन जैसे औसत कद , काठी और विचार वाले व्यक्ति को,  खुद को '' किंग खान '' कहने की गर्वोक्ति का  अवसर देते है  उनकी आर्थिक दशा क्या है ?  उनके जीवन का स्तर क्या है ? इस देश  में सक्रिय हर्षद मेहताओं, अब्दुल करीम तेलगियों, श्याम बिहारी सिन्हाओं के द्वारा  उनके साथ साथ कितना घोर आर्थिक अपराध किया जा रहा था और आज भी किया जा रहा है और यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य  में भी किया जाएगा ?
                       मुंबई में आई पी एल  को चर्चित करने के लक्ष्य से फिक्स्ड मैच खेलने वालों ने अपना काम कर दिया है , आई पी एल इस समय पहले से अधिक चर्चित हो चुका है ..मगर इस देश की वास्तविक चिंता करने वालो को अपना काम करना अभी भी बाकी है ..
             अब इस देश के युवा यह  नहीं सोचेंगे कि महाशक्ति बन रहे हमारे पड़ोसी द्वारा भारत के किस किस भूभाग को अपने नक़्शे में दिखाया जा रहा  है .. हमारे पड़ोसी  ने हमारे प्रधान को अपने ही अरुणाचल प्रदेश में जाने पर आपत्ति व्यक्त करने का साहस क्यों दिखाया था .. हमारे  देश के  घर घर में पड़ोस में बनी वस्तुएं क्यों खरीदी जा रही है .. अब वे यह नही सोचेगें कि हमें आने वाले वर्षों में विश्व-मंच पर जो ज़िम्मेदारी निभानी है उसके लिए देश से भ्रष्टाचार का सर्वनाश करते हुए देशभक्ति के आक्सीजन की  श्वास  लेनी सीखनी होगी .. अब हमारे युवा न तो इस मुद्दे पर बहस करेगे और न उसके लिए कुछ करने के लिए प्रेरित ही होगें ..
क्योंकि :  


तुम रखा करते हो अक्सर जिनके सर, सोने का ताज .
कह रहा है  मुल्क   उनका  सर  कुचलना  चाहिए ..

-- अरविंद पाण्डेय
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